Connect with us

विज्ञान क्लास 10

सौर ऊर्जा किसे कहते हैं, पवन ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा

Published

on

images 4 copy

सौर ऊर्जा

सूरज से प्राप्त ताप से जो ऊर्जा प्राप्त होती है। उसे सौर ऊर्जा कहा जाता है सूर्य की धूप से प्राप्त ऊर्जा का सीधा उपयोग भी किया जाता है तथा इसे विद्युत में बदलकर भी उपयोग किया जाता है। सौर ऊर्जा का उपयोग पानी को गर्म करने तथा भोजन पकाने जगह को गर्म करने तथा वस्तुओं को सुखाने पानी को शुद्ध करने में फसलों को पकाने प्रकाश व मशीनों के संचालन के लिए किया जाता है।

सौर तापीय ऊर्जा संग्रह को और रिसीवर के माध्यम से प्राप्त की जाती है। जबकि सौर ऊर्जा को बिजली के रूप में प्राप्त करने हेतु सौर फोटो वोल्टेक प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाता है। सौर ऊर्जा से प्राप्त बिजली का उपयोग वर्तमान में व्यवसायिक स्तर पर भी किया जाने लगा है। भारत के दूरदराज के गांवों में जहां बिजली नहीं है । वहां सौर ऊर्जा को अति सरलता से वित्त कर्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है । आज देश में 96 मेगावाट क्षमता की 980000 से अधिक सौर बिजली उत्पादन इकाई देश में स्थापित की गई है।

इन्हें पढ़ेंहरित क्रांति, पीत क्रांति, श्वेत क्रांति

पवन ऊर्जा

बहती हुई हवा की गति से जो ऊर्जा प्राप्त होती है उसे पवन ऊर्जा कहते हैं। पवन की गति का उपयोग किसी कार्य एवं परिवहन में मनुष्य बहुत पहले से करता आ रहा है वर्तमान में पवन ऊर्जा का उपयोग पवन चक्की यों के द्वारा भूगर्भ से जल निकालने के लिए भी किया जाता है ।

पवन ऊर्जा किसे कहते है

भारत में पवन ऊर्जा की कुल संभावित क्षमता 45000 मेगावाट की गई है वर्तमान में इससे 1340 मेगा वाट विद्युत उत्पादन करने की क्षमता प्राप्त की है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु और केरल तथा पश्चिम में गुजरात में अनेक पवन ऊर्जा केंद्र स्थापित किए गए हैं पवन गति की निरंतरता समुद्र तटों पर अच्छी है अतः पवन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र समुद्र तटीय होते हैं।

इन्हें पढ़ें भारत की प्रमुख फसलें

बायोमास ऊर्जा

कृषि वन पशु उद्योग एवं अन्य के अफसरों से ऊर्जा प्राप्त करना बायोमास ऊर्जा कहलाता है। बायोमास ऊर्जा गैस एवं विद्युत दोनों रूपों में प्राप्त किया जाता है । गैस उत्पादन हेतु गोबर मनुष्य का मल मूत्र तथा अन्य जैविक अपशिष्ट प्रयोग किए जाते हैं। इन्हें ऑक्सीजन रहित वातावरण में सड़ाकर मुख्यता मीथेन गैस प्राप्त की जाती है यह गैस सस्ती पड़ती है और इसके जलने से प्रदूषण नहीं होता इसे बायोगैस कहते हैं।

इसके उत्पादन के बाद से बचा अपशिष्ट पौधों के लिए खाद के रूप में उपयोगी होता है हमारे देश में बायोमास से विद्युत उत्पादन की अनुमानित क्षमता 19500 मेगावाट है तथा वर्तमान में कुल उत्पादन 292 मेगावाट है। भारत के महानगरों को इस ऊर्जा के विकास हेतु चयनित किया गया है क्योंकि यहां प्रतिदिन हजारों टन कूड़ा करकट अपशिष्ट पदार्थ के रूप में निकलता है।

इन्हें पढ़ें – अभ्रक क्या है अभ्रक के प्रकार

भूतापीय ऊर्जा

पृथ्वी का आंतरिक भाग गर्म है भूगर्भ के इस तरफ से प्राप्त ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा कहलाती है। यह उत्पादन गर्म जल के स्रोत व जलाशयों पर निर्भर करता है। हमारे देश के विभिन्न भागों में इस प्रकार के 340 जलाशय हैं । इनमें विद्युत उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण जलाशयों उतर पश्चिम हिमांचल और पश्चिम समुद्र तट पर स्थित है।

जम्मू कश्मीर के पूंगा में हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय घाटी में तथा पश्चिम तट पर भूतापीय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। छत्तीसगढ़ के तापमान में 300 किलोवाट क्षमता का विद्युत गृह विकसित किया जा रहा है। भूतापीय ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की संभावना की जांच का काम राष्ट्रीय भू वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान हैदराबाद द्वारा किया जा रहा है। गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में उपयोग साधनों के अतिरिक्त भारत में ज्वारीय ऊर्जा का विकास किया जा रहा है।

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Copyright © 2020 The News Pro Theme. Theme by The boardStudyHindi.

%d bloggers like this: