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सामाजिक विज्ञान

खेती(कृषि) क्या है,प्रकार एवं प्रणाली | Kheti in Hindi

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खेती

किसी भी भू-भाग पर संपादित कृषि कार्य को पशुधन के अनुपात एवं फसलों के उत्पादन एवं खेती की परंपरा के आधार पर वर्गीकृत करना ही खेती के प्रकार कहलाता है। किसान के उपलब्ध संसाधनों जैसे सिंचाई,उर्वरक, मशीन आदि के आधार पर खेती फसलों के उत्पादन बढ़ाने हेतु सरकार ने उन्नत किस्में विकसित की है। उन्नत किस्मों से अभिप्राय है कि अधिक उत्पादन देने वाली एवं समान परिस्थितियों में कीट से बचाने की क्षमता रखने वाली उच्च किस्में होती हैं।

खेती के प्रकार

सामान्य खेती

जब किसी फार्म का संगठन कई वस्तुओं के उत्पादन के लिए होता है और प्रत्येक उत्पादन किसी ना किसी रूप से आय का साधन होता है तो इसे सामान्य खेती कहते हैं। इस प्रकार की खेती समान किसान अपनी घरेलू आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए करता है जिससे उसकी जीवन  सुचारु रुप से चलती रहे। इस प्रकार की खेती में किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार फसल पशु धन उद्यम आदि का चुनाव करता है।

विशिष्ट खेती

इस प्रकार की खेती में एक ही उद्यम या साधन के 50% या इससे अधिक आय प्राप्त होती है  उसे विशिष्ट खेती कहते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि सोयाबीन से 50% या इससे अधिक आय हो रही है तो इससे हमें एक किसान की कुल आय कहेंगे। सोयाबीन के लिए फार्म की खेती कुछ शर्तें मे होती हैं जैसे फार्म के पास मंडी का होना, किसान की आर्थिक अवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारु रुप से चलाना।

शुष्क खेती

जिन क्षेत्रों में औसत वार्षिक वर्षा 50 सेंटीमीटर से कम होती है उन क्षेत्रों में की जाने वाली खेती को शुष्क खेती कहते हैं। शुष्क खेती में फसल उत्पादन हेतु भूमि में वर्षा के पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। शुष्क खेती में फसलों का असफल होना एवं आम बात है जिस के मुख्य कारण हैं आप पर्याप्त तथा सामान्य वर्षा वर्षा का देर से प्रारंभ होना व शीघ्र समाप्त होना । फसल के समय में लंबी अवधि नमी धारण क्षमता का कम होना मिट्टी में उर्वरता की कमी।

मिश्रित खेती

मिश्रित खेती में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है। मिश्रित खेती इस सिद्धांत पर आधारित है कि पशुपालन से प्राप्त आय कुल आय के 10% से 49% होनी चाहिए अर्थात फसल उत्पादन का प्राथमिक तथा पशुपालन पूरा कार्य के रूप में किया जाता है। फसल एवं पशुपालन में परिपूर्ण संबंध होने के कारण फार्म की उत्पादन क्षमता एवं आय बढ़ती है पशुओं के मल त्याग से बनी जैविक खाद के उपयोग से भूमि की उर्वर शक्ति भी बनी रहती है।

सिंचित खेती

भारत में सिंचित खेती प्रमुखता कुएं, नलकूप और नहर के द्वारा की जाती है । यंहा सिंचित खेती कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है जिसके फल स्वरुप फसल उत्पादन में भारी वृद्धि होती है। तथा कृषि भूमि का उपयोग सिंचाई के माध्यम से वर्षभर फसल उगाने के लिए किया जाता है । सिंचित खेती में मुख्यता धान, गन्ना, गेहूं तथा कपास की फसलों का उत्पादन किया जाता है।

खेती की प्रणालियां

  1. खेती की प्रणालियों का वर्गीकरण हम किसी की विधियों एवं भूमि के स्वामित्व के आधार पर कर सकते हैं। खेती का वर्गीकरण आर्थिक एवं सामाजिक क्रियाकलापों के आधार पर किए जाने को खेती की प्रणालियां कहते हैं। खेती की प्रणालियां मुख्य रूप से पांच प्रकार की होती हैं। जिनको उनके कार्य के प्रकार एवं स्वामित्व के आधार पर अलग-अलग बांट सकते हैं
  2. व्यक्तिगत खेती इस प्रकार की खेती में किसान के पास अपनी भूमि पर स्वामित्व एवं कार्य का अधिकार होता है। फार्म का क्रियाकलाप किसान अपने तरीके से करता है कृषि संबंधित सभी प्रकार के निर्णय कृषक खुद लेता है।
  3. सामूहिक खेती इस प्रणाली में सभी सदस्यों की जमीन पशुधन एवं संसाधन सोसाइटी के अधीन कर दी जाती है। सोसाइटी के सभी सदस्य एक प्रबंध कमेटी के निर्देशानुसार फार्म पर कार्य करते हैं।
  4. सहकारी खेती इस प्रणाली में  सभी कृषि क्रियाएं या उनका भाग सामूहिक तौर पर अपनी इच्छा के आधार पर इकट्ठा किया जाता है। किसान का अपनी भूमि पर स्वामित्व का अधिकार सुरक्षित रहता है। सभी किसान अपनी भूमि श्रम पूंजी को इकट्ठा कर एक इकाई बनाकर सामूहिक रूप से खेती करते हैं। इसमें सभी कार्य चुनी हुई कमेटी के निर्देशानुसार किए जाते हैं। फायदा जमीन के अनुपात में बांट लिया जाता है और मजदूरी के आधार पर भी बांटा जाता है। सहकारी खेती चार प्रकार की होती है सहकारी श्रेष्ठ खेती , सहकारी साझा खेती,  सहकारी कश्तकारी,  खेती सहकारी समूह खेती
  5. सरकारी खेती इस प्रणाली में फार्म का प्रबंधन सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाता है । तथा फार्म पर कार्य साप्ताहिक और मासिक मजदूरी के आधार पर दिया जाता है। इसमें भूमि एवं पूंजी सरकार द्वारा दी जाती है। अनुसंधान संस्थानों में कार्य इसी प्रणाली के तहत किया जाता है।
  6. पूंजीवादी खेती इस प्रकार की खेती में भूमि के स्वामी के द्वारा पूंजी लगाकर खेती करवाई जाती है। खेती का प्रबंधन मैनेजर को वेतन देकर कराया जाता है। फायदा या नुकसान की जिम्मेदारी उद्यमी की होती है । कई उद्योग मालिक जैसे गन्ना उद्योग भूमि खरीद कर उस पर गन्ने की खेती करवाते हैं।

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